शनिवार, 28 फ़रवरी 2009

SOME ROMANTIC GAMES IN MARRIAGE


शादी के समय खेले जा सकने वाले कुछ रूमानी खेल

शादी-ब्याह जैसे माहौल में खेल- पहेली, आमोद-प्रमोद, चुहलबाजी और शरारत आदि न हो तो वातावरण सूना-सा लगने लगता है। यहां ऐसे मौके को और भी उल्लासमय बनाने के लिए कुछ मजेदार व दिलचस्प खेल दिए जा रहे हैं जिन्हें सिर्फ दूल्हा-दुल्हन ही नहीं, दोनों पक्षों के स्त्री-पुरुष भी खेल सकते हैं। ये खेल मात्र खेल ही नही हैं बल्कि इस खेल के मध्यम से दो रिश्तों के जुरने में काफ़ी मदद मिल सकेगी। देखिये विवाह एक ऐसा महत्वपूर्ण समारोह है जिसमे दो अनजान परिवार एक दुसरे से जीवन पर्यंत जुड़ जाते हैं, लेकिन ये अनजान परिवार आपस में जल्द से जल्द मिल सके, ये खेल मात्र इसका ही प्रयास है। दूल्हा और दुल्हन एक दुसरे से अनजान होते हैं उनके अन्दर विवाह होने के तुंरत बाद भी एक झिझक अवश्य होती है और इन खेलो के माध्यम से निश्चय ही उनमे एक जान-पहचान का माहौल बन सकेगा और साथ ही मनोरंजन भी हो जाएगा। आइये देखे की कौन कौन से खेल खेले जा सकते हैं :--

अंताक्षरी- विवाह समारोह में खेला जाने वाला यह सबसे अधिक लोकप्रिय खेल हो सकता है । इसमें सभी स्त्री-पुरुष अलग-अलग दो टीमें बनाते हैं। उम्र का कोई बंधन नहीं होता। शादी या रोमांस से संबंधित गीत ही ज्यादातर गाए जाते हैं। प्राय: स्त्रियों की टीम खेल की शुरुआत करती है। गीत के अंतिम अक्षर से शुरू होने वाला गीत दूसरे पक्ष को 10 गिनने तक सुनाना पड़ता है। साथ देने के लिए ढोलक या हारमोनियम भी बजाए जाते हैं।
जादू तेरी नजर- किसी भी उम्र के स्त्री-पुरुष थोड़ी देर इकट्ठे होकर यह गेम खेल सकते हैं। कोई एक व्यक्ति एक-एक करके सबको बुलाता है और प्रत्येक एक-एक करके सबको बुलाता है और प्रत्येक व्यक्ति से उसके विपरीत सैक्स के बारे में तीन ऐसी बातें पूछता है जिसकी वजह से वह व्यक्ति उक्त स्त्री पुरुष से प्रभावित है। ये बातें उक्त स्त्रीपुरुष की ड्रेस का रंग, स्टाइल, जूते व बालों की स्टाइल आदि भी हो सकती हैं। ये बातें बताने वाले की आंखें बंद होनी चाहिए। युवा लड़कों का ग्रुप इन बताई गई बातों के आधार पर भीड़ में उक्त स्त्री पुरुष को ढूंढ़ता है और उसे बताने वाले व्यक्ति के ठीक सामने लाकर खड़ा कर देता है। इस वक्त माहौल बड़ा रोमानी और शरारतपूर्ण हो उठता है।
जाने कहां मेरा जिगर गया जी -- यह खेल शादीशुदा जोड़े या प्रेमी युगल के खेलने के लिए है। पुरुषों की एक पंक्ति स्त्रियों की एक लाइन के पीछे, पीछे की ओर मुंह करके इस प्रकार खड़ी हो जाती है कि दोनों पंक्ति के व्यक्ति एक-दूसरे को नहीं देख पाएं। एक-एक करके प्रत्येक स्त्री जोर से बोलती है, मेरा दिल कहां गया या साड्डा दिल खोयाजी या ऐसा कोड जो सिर्फ उसका प्रेमी या पति ही समङाता हो। इसमें नाम पुकारना मना है। स्त्री के जवाब में उनका पति या प्रेमी पीछे से जवाब देता है 'मैं यहां हूं प्रिये! या असी इत्थे हैं अब दोनों एक दूसरे को देखते हैं और सही पार्टनर होने पर लाइन से निकल जाते हैं। गलत जवाब देने या कोड बोलने वाले व्यक्ति की जगह बदल दी जाती है और सही पार्टनर मिलने तक खेलते रहना पड़ता है। यह दूल्हा-दुल्हन भी खेल सकते हैं।
पिलो टॉक- दूल्हा-दुल्हन द्वारा खेला जाने वाला यह खेल काफी दिलचस्प है। एक तकिए को दूल्हे और दुल्हन के कंधों के बीच में इस तरह रख दिया जाता है कि दोनों एक-दूसरे को न देख पाएं। वर पक्ष के युवा समूह द्वारा प्रश्नों की एक सूची तैयार की जाती है। प्रश्न पूछे जाने पर वर एवं वधू दोनों को 'हां या 'ना' में सिर्फ सिर हिलाकर जवाब देना पड़ता है। चूंकि दोनों एक-दूसरे को नहीं देख पाते अत: उन्हें एक दूसरे को उत्तर भी नहीं देना होता। प्रश्न हल्के-फुल्के व मजेदार किस्म के होते हैं जैसे- क्या आपको आपके सपनों का राजारानी मिल गया/गई आप को फलां डिश/रंग/फिल्म पसंद है या नहीं आदि। यहां नवविवाहित जोड़े का सिर हर प्रश्न के जवाब में एक जैसा हिलता है या अलग तरह से? यह दर्शकों में दिलचस्पी पैदा कर देता है और उन्हें हंसने-खिलखिलाने पर मजबूर कर देता है। यदि वर-वधू दोनों के जवाब ज्यादातर मिलते हो तो उन्हें 'दो जिस्म, एक जान। या जवाब कम मिलते हों तो 'मैं तुम्हें और नजदीक से जानना चाहता हूं- जोड़ा जैसे टाइटल दिए जाते हैं।
दूल्हे का टैक्स- यह एक ऐसा गेम है जो मुख्यत: दूल्हे व उसकी नटखट सालियों के बीच खेला जाता है। इसमें सालियां एक-एक करके दूल्हे को अपना नाम, पसंद-नापसंद आदि के बारे में बताती हैं। इसके बाद दूल्हे को सबके नाम व हॉबी याद करके सही-सही बताने होते हैं। जरा-सा गडबड़ाने पर दूल्हे को प्रश्नकर्ता को 'दूल्हे का टैक्स' के रूप में 100 रुपए देने पड़ते हैं। इसके बाद दूसरी साली का नंबर आता है। सिन्ड्रेला- यह खेल वर या वधू पक्ष के युवा समूह के बीच खेला जाता है। लड़कियों का एक समू्ह बिना सैंडिल या जूते पहने बीच में एक जगह खड़ा हो जाता है। सारे जूते सैंडिल वगैरह का ढेर उनके सामने रख दिया जाता है। अब युवा लड़के जूतों के पास आकर एक जोड़ा जूतासैंडिल पहनने वाली लड़की को ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं। जो लड़का सही पहचान लेता है उसे उक्त लड़की के साथ विवाह का नृत्य करना व गाना-गाना पड़ता है।
तुम्हारा हाथ मांगता हूं- यह वधू पक्ष को औरतों और दूल्हे के साथ खेला जाने वाला दिलचस्प खेल है। इसके लिए एक लंबा बड़ा कपड़ा या पुरानी साड़ी की जरूरत पड़ती है। इसमें कई ऐसे गोल छेद कर दिए जाते हैं जिसमें एक हाथ डालने की पूरी जगह हो। इस साड़ी का परदा बनाकर दो व्यक्तियों द्वारा पकड़ा जाता है। साडी क़े एक तरफ दुल्हन तथा अन्य औरतें साड़ी में किए छेद में अपना हाथ कलाई तक डालती हैं। दूसरी तरफ दूल्हा खड़ा रहता है जहां से उसे छेद में बाहर निकले कई हाथ दिखाई पड़ते हैं अब इनमें से दूल्हे को अपनी दुल्हन का हाथ पहचान कर थामना है। इसमें दूल्हे की सालियां भी दुल्हन की तरह हाथों में मेहंदी रचाकर व चूड़ा पहनकर खूब छकाती है। दूल्हे को तीन मौके दिए जाते हैं। यदि वह नहीं पहचान पाता तो उसकी शामत आती है। उसकी सालियां उसे खूब तंग करती हैं, दुल्हन को सौंपने से इंकार करती है या फिर उसे जुर्माने के तौर पर रुपए देने पड़ते हैं।
शब्द पकडो गीत गाओ -- वर एवं वधु पक्ष के लोग दो टीम अलग अलग बनाकर यह खेल खेल सकते हैं। टीम बनाये जाने के बाद एक सिक्के से हेड एवं टेल के आधार पर विजयी टीम अपनी पसंद का गाना शुरू करेगा। कोई एक सदस्य अपनी पसंद का गाना गायेगा और दूसरा पक्ष उस गाने को ध्यान से सुनता रहेगा फ़िर उस गाने को ख़त्म होने पर दूसरा पक्ष पहले पक्ष के द्वारा गए हुए गाने में से किसी एक शब्द को चुनकर अपना गाना शुरू करेगा। यह खेल अन्ताक्षरी की तरह ही खेला जायेगा लेकिन अन्ताक्षरी में अन्तिम अक्षर को चुन कर के गाया जाता है परन्तु इस खेल में गाये हुए गाने के किसी भी शब्द को चुनकर गाना गाया जा सकता है। वस्तुतः देखा जाए तो अन्ताक्षरी में अन्तिम अक्षर के आधार पर दुसरे पक्ष को गाने में अक्षर के अनुसार ज्यादा विकल्प नही मिल पाते और खेल का मजा ख़राब हो जाता है जब प्रतियोगिता टक्कर की नही हो पाती है। किसी एक पक्ष के कमजोर पर जाने यानी गानों का स्टॉक न हो पाने की स्थिति रोचक नही हो पाती और एक टीम कमजोर पर जा सकती है और दूसरी टीम मजबूत। जबकि ये ध्यान रखना आवश्यक है की ये प्रतियोगिता विवाह में शामिल होने वाले दोनों पक्षों में एक जान पहचान बनाने के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए हैं। इन खेलो में हार भी अपनी आप में एक जीत है। इसलिए गाने के इस खेल को भी रोचक और सरल बनाने के लिए अन्ताक्षरी की तरह अन्तिम अक्षर पर आधारित गाना चयन न करके पहले पक्ष के द्वारा गाये हुए गाने के किसी भी शब्द को चुनकर गाने का प्रावधान दिया है, जिस से की खेल में रोचकता कायम रहे और काफ़ी समय तक चल सके। उदहारण के लिए एक गाना है-- "तू मेरे सामने मैं तेरे सामने, तुझे देखू की प्यार करू" अब इस गाने को अन्ताक्षरी में खेला जाए तो ये मुश्किल है की "रु" अक्षर से गाना गाया जाना आसान नही होगा या फ़िर आम सहमती से "रु" के बदले "र" से भी गाने की अनुमति देनी पड़ती है जिसके कारन विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसलिए अन्ताक्षरी की तरह अन्तिम अक्षर को पाकर कर दुसरे पक्ष को नही गाना है बल्कि उनके पास बहुत सारा विकल्प है गाने के लिए क्योंकि अन्तिम अक्षर पर नही गाना है बल्कि गाये हुए लाइन में से किसी भी शब्द को चुनकर गाना गया जा सकता है। जैसे, गाने का जो उपरोक्त उदाहरण दिया है उसमें से किसी भी शब्द के आधार पर गाना गाया जा सकता है।

अब बताइये कैसे लगे आपको मेरे द्वारा बनाये गए ये खेल ? अगर आपको कुछ कहना है तो जल्दी से इस ब्लॉग पर अपना कमेन्ट दर्ज करिए। आपका हरेक कमेन्ट चाहे वो 'हाँ' हो या 'ना' हो या आप सहमत हो या असहमत हो प्लेस संकोच मत करिए अपनी भावनाओं को कमेन्ट में जरूर दर्ज करीए आपके कमेन्ट का हम बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।

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